धन्यवाद 2019

2019 में मैंने क्या पाया और क्या खोया पता नहीं , मगर हा बहुत कुछ सिखा है । इस पूरे साल में मैने जीवन जीने की कला और लोगों को पढना सीख लिया है। मै भले ही कुछ साल पहले एक छोटे से शहर के छोटे से गाँव का तथाकथित एक्टर था, मेरा ना ही नाम था और नाही कोई पहचान। मेरे बारे में कोई नहीं जानता था नाही खुद मै, किसी को कोई खबर नही था कि छोटे से गाँव का लड़का एक दिन टीवी सिरियल और फिल्मों में काम करेगा। कोई मुझे जानता भी नहीं था जो जानते भी थे वे मेरा सिर्फ आलोचना की नजरों से देखा करते थे । उन सभी आलोचना का सामना मैने उनका सम्मान करते हुए किया सिर्फ यह सोच कर की शायद वे लोग मेरे बारे में गलत ही क्यों नहीं सोच रहे कोई परवाह नहीं मुझे तो आगे बढते जाना है । 2019 के पूरे साल मैने अकेले ही संघर्ष भरा रास्ता को तह किया मुझे तो ये भी पता नहीं था चलना कैसे है। बस गिर गिर कर संभलना और चलना सिख लिया । दिल में बस एक ही अरमान था मुझे सिखना है और अपने लक्ष्य कि तरफ आगे बढ़ते रहना है । अपने गाँव चैनपुर से मुम्बई का सफर आसान नहीं था, अकेलापन, संघर्ष, आलोचना, दर्द, संकट, विरोध, रिजेक्शन, भुखा प्यासा, लोगों की गाली आदि का सामना करना पड़ा। सबकुछ सहन करने की आदत हो चुकी है। आदत इतनी हद तक हो गई है कि मानों मुझे किसी भी चीज का कोउ फर्क नहीं पड़ता । दिमाग में सिर्फ एक ही ख्याल संघर्ष कर चमकना है और वो समय भी आ चुका है कि लोग मुझे पहचान रहे हैं, सम्मान दे रहे हैं, प्यार कर रहे हैं । अपना खुद का, खुद के दम पर, स्वयं के द्वारा जीवन, अपना पहचान बना लिया है जिसके बलबूते मैने बेलगाम फिल्म, राधाकृष्ण, लव कुश, चंद्र गुप्त मौर्य, झाँसी की रानी, केशरी नंदन, पोरस आदि कई टीवी सिरियल मे काम किया जिससे मुझे लोग जान पहचान रहे हैं। मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की मैने क्या क्या पाया, मुझे सिर्फ आगे बढ़ते रहना है। 

जीवन में इस बड़ी सफर के दौरान कई ऐसे मोड़ आए जहाँ लोगों ने, रिस्तेदारों ने, दोस्तों ने आदि लोगो ने मेरा साथ छोड़ दिया मगर मैने कभी भी खुद को पीछे मुड़ कर नहीं देखा । अब ऐसा समय आया है कि वही लोग मुझे याद करते हैं और मेरे सफल होने,मेरे बडे़ होने का गुनगान करते नहीं थकते है। उनके जूबान पर सिर्फ एक ही लाईन होता है कि " सुनिल तुम तो बड़े आदमी हो गए हो, तुम तै टीवी मे आ रहे हो, सुपर स्टार हो गए हो आदि आदि " मगर मेरे लिए ये शब्द सिर्फ छोटी सी शब्द के बराबर है इनका कोई मोल नहीं है। आज भी और हमेशा याद रहेगा कि मेरे मुश्किल के वक्त के समय मेरे माता पिता और कुछ गुरुजन साथ थे जिन्होंने मेरे हौसलों को संभाल कर हमेशा प्रेरित किया। जब जब आवश्यकता होती तब तब मेरे माता पिता मेरे साथ थे उन्होंने कभी हाताहत होने का अवसर नहीं दिया साथ ही गुरु जनों ने हमेशा मुझे प्ररेणा देते रहे जिनका कर्ज मै कभी नहीं चुका सकता। 

2019 से मैने इतना कुछ। सिखा है कि गीनती नहीं कर सकता बस धन्यवाद कर सकता हूँ कि 2019 ने मुझे हमेशा प्रेरित कर कामयाब बनाने के लिए एक से बडे़ एक अवश्य दिया । जिसे मैने भुनाने मे कोई कमी नहीं किया जिसका फल मै क्या हूँ आप सभी के सामने है । बस बार बार, हजार बार एक ही शब्द 2019 धन्यवाद।